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होम्योपैथी क्या है?
होम्योपैथी की खोज एक जर्मन चिकित्सक, डॉ. क्रिश्चन फ्रेडरिक सैमुएल हैनिमैन (1755-1843), द्वारा अठारहवीं सदी के अंत के दशकों में की गयी थी। यह “सम: समम् शमयति” या “समरूपता” दवा सिद्धांत पर आधारित एक चिकित्सीय प्रणाली है।

होम्योपैथी कोई विज्ञान नहीं है।
यह एक नैनोविज्ञान है. यह दो अपरंपरागत सिद्धांतों “सम: समं समयति” पर आधारित है – यह धारणा कि किसी बीमारी को ऐसे पदार्थ से ठीक किया जा सकता है जो स्वस्थ लोगों में समान लक्षण पैदा करता है। “न्यूनतम खुराक का नियम” – यह धारणा कि दवा की खुराक जितनी कम होगी, उसकी प्रभावशीलता उतनी ही अधिक होगी।

होम्योपैथिक कच्चे उत्पाद पौधों (जैसे लाल प्याज, अर्निका [पहाड़ी जड़ी बूटी], ज़हर आइवी, बेलाडोना [घातक नाइटशेड], और चुभने वाली बिछुआ), खनिज (जैसे सफेद आर्सेनिक), या जानवरों (जैसे कुचली हुई पूरी मधुमक्खियाँ) से आते हैं।

होम्योपैथिक उत्पाद अक्सर जीभ के नीचे रखने के लिए चीनी की गोलियों के रूप में बनाए जाते हैं; वे अन्य रूपों में भी हो सकते हैं, जैसे मलहम, जैल, ड्रॉप्स, क्रीम और टैबलेट।

होम्योपैथिक उपचार की विशिष्टता है “व्यक्तिगत” या प्रत्येक व्यक्ति के अनुरूप होना। उपचार का आधार मानसिक व शारीरिक लक्षणों का विश्लेषण एवं मूल्यांकन कर एक ही स्थिति वाले अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग उपचार किया जाना होम्योपैथी पद्धति की एक बेजोड़ विशेषता है। होम्योपैथी व्यक्तियों को उपचार निर्दिष्ट करने के लिए एक अलग निदान प्रणाली का उपयोग करती है और संकेतो, मानसिक और विशिष्ट लक्षणों के नैदानिक ​​​​पैटर्न को पहचानती है जो पारंपरिक चिकित्सा से भिन्न होते हैं।

सच तो यह है कि होम्योपैथी वर्तमान में अपने सिद्धांतों के अनुसार न चलकर पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों के अनुरुप चलने का प्रयास कर अपना अभूतपूर्व नैनोविज्ञान के पथ से अलग चल रही है। आज होम्योपैथी में दवा उत्पादक रिसर्च के नाम पर पेटेंट्स बना रहे हैं एवं अधिकतर चिकित्सकों द्वारा, दवा विक्रेता द्वारा एवं स्वयं क्रय कर उपयोग में लाए जा रहें हैं जो सर डॉ हैनिमैन जी द्वारा स्थापित होम्योपैथिक सिद्धांतों व नियमों के अनुरुप नहीं होने के कारण अच्छे प्रतिफल नहीं मिल पा रहे हैं जिस कारण होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति बहुत धीरे असर करती है या कुछ रोगों में ही लाभकारी है, का अभिशाप झेल रही है।

होम्योपैथी एक सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है जिसमें रोगों में प्राणी की (VITAL-FORCE) जीवनी शक्ति जो DERANGED होती है उसे RESTORE किया जाता है और उसके लिए प्रत्येक व्यक्ति के मानसिक,चारित्रिक एवं शारीरिक लक्षणों का सूक्ष्म निर्धारण,विश्लेषण एवम मूल्यांकन कर Similimum एवं Minimum दवाएँ निर्धारित की जाती हैं।
होम्योपैथी पद्धति के सिद्धांतों पर पूर्णतया चलने वाले चिकित्सकों द्वारा रोगियों के सूक्ष्म मानसिक,चारित्रिक,एवं शारीरिक लक्षणों को संयोजित कर सभी नए,पुराने एवं जटिल रोगों की चिकित्सा सफलता पूर्वक की जा रही है।

इसमें,बाल-रोग,स्त्री-रोग,एवं अन्य सभी रोगों का उपचार योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा “RAPID, GENTLE AND PERMANENT” होम्योपैथिक सिद्धान्त से किया जाता है।

Dr. Lalit Mohan Johri

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